Compositor: Anand Bakshi
बड़ा नाटखट है रे कृष्ण-कन्हैय
का करे यशोदा मैय्य
हाँ बड़ा नाटखट है र
ढूंढे री अंखियाँ उसे चारों ओर
जाने कहाँ छुप गया नंदकिशोर
ढूंढे री अंखियाँ उसे चारों ओर
जाने कहाँ छुप गया नंदकिशोर
उड़ गया ऐसे जैसे पुरवय्य
का करे यशोदा मैय्य
हाँ बड़ा नाटखट है र
अ तोहे मैं गले से लगा ल
लागे ना किसी की नज़र मन में छुपा ल
अ तोहे मैं गले से लगा ल
लागे ना किसी की नज़र मन में छुपा ल
धूप जगत है रे ममता है छैन्य
का करे यशोदा मैय्य
हाँ बड़ा नाटखट है र
मेरे जीवन का तू एक ही सपन
जो कोई देखे तोहे समझे वो अपन
मेरे जीवन का तू एक ही सपन
जो कोई देखे तोहे समझे वो अपन
सब का है प्यार
हो सब का है प्यारा बंसी-बजाय्य
का करे यशोदा मैय्य
हाँ बड़ा नाटखट है र